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डिजिटल दौर में भी पुस्तक मेले का आकर्षण बरकरार, बिक्री पर टिकी प्रकाशकों की उम्मीद

*धनबाद :* धनबाद जिले के रणधीर वर्मा स्टेडियम में आयोजित पुस्तक मेला इन दिनों लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. मेले में हर वर्ग के लोग पहुंच रहे हैं, लेकिन भीड़ के मुकाबले किताबों की खरीद कम नजर आ रही है. डिजिटल माध्यमों के बढ़ते प्रभाव के बीच पढ़ने की आदतों में बदलाव साफ दिख रहा है, हालांकि पुस्तक प्रेमियों के बीच अब भी किताबों का महत्व बरकरार है.
*स्टॉल पर 80 प्रकार की पुस्तकें उपलब्ध*
पुस्तक मेले में एक ओर जहां विभिन्न विषयों और धर्म, साहित्य, इतिहास से जुड़ी किताबों की भरमार है. वहीं, दूसरी ओर पब्लिशर्स उम्मीद के मुताबिक सेल्स पर भरोसा कर रहे हैं. गिरिडीह के कबीर ज्ञान प्रकाशन के प्रतिनिधि दीपक कुमार बताते हैं कि उनके स्टॉल पर संत कबीर, भगवत गीता और सनातन धर्म से संबंधित करीब 80 प्रकार की पुस्तकें उपलब्ध हैं.
*लोगों की रुचि फिर से किताबों की ओर*
उनके अनुसार, आज के समय में लोगों के हाथों में मोबाइल फोन है, जिससे पढ़ने की आदतों में बदलाव आया है. युवाओं में पहले जैसा पुस्तकों के प्रति रुझान कम हुआ है, लेकिन जो लोग पढ़ने के शौकीन हैं, वे आज भी किताबों से जुड़े हुए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि बीच में किताबों की बिक्री घटी थी, लेकिन अब डिजिटल के साथ-साथ फिर से लोगों की रुचि किताबों की ओर बढ़ रही है.
*किताबों से मिलने वाला ज्ञान कहीं और नहीं मिल सकता- छात्रा*
वहीं, पीजी की छात्रा नेहा का कहना है कि पुराने लेखकों की किताबें अक्सर ऑनलाइन या बाजार में उपलब्ध नहीं होती हैं. ऐसे में पुस्तक मेला एक बेहतर मंच साबित होता है, जहां दुर्लभ किताबें आसानी से मिल जाती हैं. उनका मानना है कि डिजिटल माध्यम कितना भी विकसित हो जाए, लेकिन किताबों से मिलने वाला ज्ञान कहीं और नहीं मिल सकता.
पुस्तक प्रेमी किशन कुमार गोयल के अनुसार, किताब पढ़ने का अनुभव डिजिटल माध्यम से बिल्कुल अलग होता है. उन्होंने कहा कि मोबाइल पर लोग चीजों को जल्दी-जल्दी देखते हैं और भूल जाते हैं, जबकि किताबें गहराई से समझने का अवसर देती हैं. उनके मुताबिक, एक लेखक की सालों की मेहनत और अनुभव एक किताब में समाहित होता है, जिससे पाठक को व्यापक ज्ञान मिलता है.
*लोगों में मेले को लेकर उत्साह*
हालांकि, मेले में स्टॉल लगाने वाले कई छोटे प्रकाशकों के लिए खर्च और बिक्री के बीच संतुलन बनाना चुनौती बना हुआ है. बावजूद इसके, बच्चों और पुस्तक प्रेमियों के बीच मेले को लेकर उत्साह देखने को मिल रहा है. कुल मिलाकर, डिजिटल दौर के प्रभाव के बावजूद पुस्तक मेले आज भी ज्ञान और साहित्य के प्रति लोगों की रुचि को जीवित रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बने हुए हैं.

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